
गौतम यादव से बातचीत: Vichitra Puraan से Mad Dog Publications तक
COMICSLELO INTERVIEW | 01
कॉमिक्स की नई पीढ़ी के लेखकों में गौतम यादव एक ऐसा नाम हैं, जिन्होंने Vichitra Puraan के जरिए हॉरर और डार्क स्टोरीटेलिंग को एक अलग अंदाज में पेश करने की कोशिश की। अब उन्होंने Mad Dog Publications की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य सामान्य से हटकर नई तरह की कहानियों को पाठकों तक पहुँचाना है।
इसी सिलसिले में ComicsLelo ने गौतम यादव से उनके कॉमिक्स सफर, Vichitra Puraan और Mad Dog Publications को लेकर बातचीत की।
ComicsLelo: सबसे पहले अपने बारे में बताइए—कॉमिक्स की दुनिया में आपका सफर कैसे शुरू हुआ?
Gautam Yadav:
कॉमिक्स के साथ मेरी कहानी लगभग हर उस पाठक जैसी ही है, जिसे बचपन से कहानियों का शौक रहा हो। बचपन में बड़ों से कहानियाँ सुनीं, फिर विक्रम-बेताल, सिंहासन बत्तीसी, नाना-नानी की कहानियाँ और पंचतंत्र जैसी क्लासिक्स मेले से खरीदकर पढ़ीं। उसके बाद उपन्यास और कॉमिक्स आए और धीरे-धीरे हॉलीवुड की अलग-अलग तरह की कहानियों ने भी मेरी कल्पना की दुनिया को और बड़ा किया।
शायद वहीं से मेरे अंदर कहानियाँ गढ़ने और उन्हें अपनी तरह से कहने की इच्छा पैदा हुई। शुरुआत में यह सिर्फ एक शौक था, लेकिन धीरे-धीरे कहानी लिखना मेरे लिए खुद को व्यक्त करने का एक माध्यम बन गया। कॉमिक्स ने मुझे खास तौर पर इसलिए आकर्षित किया क्योंकि इसमें कहानी सिर्फ शब्दों से नहीं, बल्कि चित्र, फ्रेम, संवाद और सन्नाटे—सब मिलकर कही जाती है।
ComicsLelo: Vichitra Puraan का विचार आपके मन में कैसे आया और इसके पीछे आपकी मूल प्रेरणा क्या थी?
Gautam Yadav:
Netflix का एक शो है Love, Death & Robots। उसकी छोटी-छोटी कहानियों ने मुझे बहुत ज़्यादा प्रभावित किया था। वे कहानियाँ ऐसी थीं, जो खत्म होने के बाद आपको कुछ समय के लिए सोचने के लिए भी मजबूर कर दें।
तो वहीं से विचार आया कि क्यों न कुछ ideas, जो मेरे मन में हैं, उन्हें भी दुनिया के सामने पेश करने का एक माध्यम दिया जाए। तो इस प्रकार Vichitra Puraan एक कॉमिक्स के रूप में लोगों के सामने आया।
इसके पीछे की मूल प्रेरणा थी कि Indian comics में horror के नाम पर वही भूत, प्रेत, आत्मा या हवेली वाला concept जो दशकों से चला आ रहा है। मुझे as horror अपनी पहली किताब के साथ वही नहीं करना था, इसलिए कुछ अलग try किया।

ComicsLelo: Vichitra Puraan पर काम करते हुए आपके लिए सबसे बड़ी सीख क्या रही?
Gautam Yadav:
मेरे लिए पहली सीख यही रही कि सिर्फ एक अच्छा idea होना काफी नहीं है, उसे सही तरीके से सामने रखना भी उतना ही जरूरी है।
कॉमिक्स में आप अकेले काम नहीं करते। Writer के साथ artist, letterer और बाकी पूरी team मिलकर एक कहानी को final रूप देती है। Vichitra Puraan के दौरान मुझे यह समझ आया कि जो चीज़ हम लिखते समय अपने दिमाग में सोच रहे होते हैं, जरूरी नहीं कि वही चीज़ सामने वाले को भी उसी तरह महसूस हो। इसलिए storytelling के साथ-साथ उसे visually कैसे present करना है, इस पर भी ध्यान देना बहुत जरूरी है।
और एक writer के तौर पर शायद सबसे बड़ी सीख यही रही कि कहानी लिखते समय सिर्फ यह नहीं सोचना चाहिए कि मुझे क्या कहना है, बल्कि यह भी सोचना चाहिए कि पढ़ने के बाद सामने वाला क्या महसूस करेगा। पाठकों से प्यार मिला, सुझाव मिले और उन्होंने गलतियाँ भी गिनाईं। सभी का आभार।
उम्मीद है आगे भी आप सभी अपने अच्छे-बुरे, जो भी विचार हों, प्रकट करते रहेंगे। इससे बेहतर करने की गुंजाइश बनी रहती है।
ComicsLelo: अब आपने Mad Dog Publications की शुरुआत की है। इसे शुरू करने का विचार कब आया और इसकी जरूरत आपको क्यों महसूस हुई?
Gautam Yadav:
मुझे अपनी कहानियों के साथ full creative freedom चाहिए थी। कई बार आपके पास कोई idea होता है, लेकिन उसे एक तय format या किसी conventional expectation के हिसाब से ढालना पड़ता है। और मैं ऐसा बिल्कुल भी नहीं चाहता था।

ComicsLelo: Mad Dog Publications का vision क्या है? आप इससे किस तरह की कॉमिक्स और किन नए creators को सामने लाना चाहते हैं?
Gautam Yadav:
हमारा vision बहुत सीधा है—पाठकों को normal से हटकर कुछ नए तरह की कहानियाँ पेश करना है। हमारा सबसे बड़ा goal यह है कि अगर कोई पाठक अपना कीमती समय और पैसा हम पर invest कर रहा है, तो हम उसे ऐसा content दे पाएँ कि पढ़ने के बाद उसे खुद को ठगा हुआ महसूस न करे।
हम ऐसी कॉमिक्स बनाना चाहते हैं जो सिर्फ मनोरंजन करके खत्म न हो जाएँ, बल्कि पढ़ने के बाद पाठक के मन में कोई विचार, कोई सवाल या कोई एहसास छोड़ जाएँ।
फिलहाल हमने 2027 के लिए तीन अलग-अलग books schedule की हैं, जिनमें दो series हैं और एक one-shot है। Creators चाहें तो अपने ideas हमें pitch कर सकते हैं, लेकिन उन्हें platform देने में हमें थोड़ा वक्त लग सकता है, क्योंकि हमारा पहला focus फिलहाल अपनी scheduled कहानियों को पूरा करने पर रहेगा।
हमारा मकसद यह नहीं है कि एक issue निकालकर industry से गायब हो जाएँ। हम long-term काम करना चाहते हैं और जो कहानियाँ हम शुरू कर रहे हैं, पहले उन्हें पूरा करने की जिम्मेदारी लेंगे। उसके बाद ही नई कहानियाँ लेकर आएँगे।
ComicsLelo: क्या Mad Dog मुख्य रूप से horror और dark stories पर केंद्रित रहेगा, या भविष्य में दूसरे genres के लिए भी जगह होगी?
Gautam Yadav:
Horror और dark storytelling निश्चित रूप से Mad Dog का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होंगे, क्योंकि व्यक्तिगत रूप से भी इन genres में मेरी काफी रुचि है। लेकिन Mad Dog को सिर्फ horror तक सीमित करने का हमारा इरादा नहीं है।
Science fiction, fantasy, mythology, action, thriller और कई दूसरे genres के लिए भी यहाँ जगह होगी। आसान शब्दों में कहें तो genre से ज्यादा महत्वपूर्ण हमारे लिए यह है कि कहानी है। कहानी दमदार होगी तो genre से फर्क नहीं पड़ता।
ComicsLelo: आज के Indian comics scene को एक creator और publisher—दोनों नजरिए से देखते हुए, आपको सबसे बड़ी कमी कहाँ दिखाई देती है?
Gautam Yadav:
मुझे लगता है कि Indian comics में talent की कमी बिल्कुल नहीं है। Writers, artists और दूसरे creators बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। चुनौती शायद यह है कि हर तरह की कहानी के लिए पर्याप्त space और audience तक पहुँचने के रास्ते अभी विकसित हो रहे हैं।
मैं यह मानता हूँ कि भारत में लोगों ने पहले की अपेक्षा कॉमिक्स पढ़ना कम कर दिया है, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल भी नहीं है कि भारत में इसका market नहीं रहा, क्योंकि Western comics का एक बहुत बड़ा market India में है।
मेरे हिसाब से हमें अपनी कहानियों को और बेहतर करने की जरूरत है और साथ ही marketing पर भी थोड़ा ज्यादा ध्यान देना होगा। अगर हम अच्छी कहानियों के साथ उन्हें सही audience तक पहुँचाने में सफल हो जाएँ, तो मुझे उम्मीद है कि Indian comics का market फिर से काफी बेहतर तरीके से grow कर सकता है।
ComicsLelo: अगले कुछ वर्षों में Gautam Yadav और Mad Dog Publications को आप कहाँ देखना चाहते हैं?
Gautam Yadav:
अभी मेरे लिए यह शुरुआत है। अगले कुछ वर्षों में मैं Mad Dog को एक ऐसी independent comic publication के रूप में देखना चाहता हूँ जिसकी अपनी पहचान हो और जिसके नाम से पाठक यह उम्मीद करें कि यहाँ कुछ अलग पढ़ने को मिलेगा।
एक लेखक के तौर पर भी मैं लगातार नई तरह की कहानियाँ लिखना चाहता हूँ और अलग-अलग mediums में storytelling को explore करना चाहता हूँ।
और अगर कुछ वर्षों बाद कोई नया creator यह कहे कि “मैंने Mad Dog की कोई comic पढ़ी थी और उसी से मुझे अपनी कहानी बनाने की प्रेरणा मिली,” तो मेरे लिए उससे बड़ी उपलब्धि शायद कोई नहीं होगी।
ComicsLelo की ओर से
गौतम यादव से हुई यह बातचीत न सिर्फ Vichitra Puraan के पीछे की सोच को समझने का मौका देती है, बल्कि Mad Dog Publications के जरिए भारतीय कॉमिक्स में नई तरह की कहानियों के लिए बनाई जा रही जगह की एक झलक भी देती है।






